भाषागत परिवर्तन को आत्मसात् करती हिन्दी पत्रकारिता

  • डाॅ. सुषमा शाही

Abstract

भाषा की गुणवत्ता के लिए उसके आदर्ष और मानक रुप को स्थापित करना आज की आवष्यकता है। समय की मांग है कि भाषा क्लिष्टता के बोझ से हल्की और जनता तक पहँुचें। पत्रकारिता के बढते सामाजिक प्रभाव से जन सामान्य में भाषा को लेकर जन - जागृति न केवल प्रदेष स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी देखी जा सकती है। आज भाषा मानकीकृत रुप में नहीें बल्कि जन साधारण में प्रयोग की जाने वाली भाषा हैं। भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उसे जन-साधारण का प्रयोग करना अनिवार्य है, परंतु भाषा के रूप को बिगाड़ना गलत है क्योंकि किसी भी देष की भाषा और शैली उस देष की संस्कृति की मूल होती है। भाषागत परिवर्तन को आत्मसात करना एक सराहनीय प्रयास है। परंतु उस सीमा तक जहां तक भाषा के मूल रूप में परिवर्तन न हो।
How to Cite
डाॅ. सुषमा शाही. (1). भाषागत परिवर्तन को आत्मसात् करती हिन्दी पत्रकारिता. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 INTERNATIONAL JOURNAL IF:7.98, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 5(5). Retrieved from http://www.ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/1038